केंद्रीय बजट (Budget) – 2017-18

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केंद्रीय  बजट (Budget) – 2017-18

 

 

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 का बजट संसद में पेश किया । भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब आम बजट और रेल बजट एक साथ पेश किया गया। इससे पहले आम बजट और रेल बजट अलग अलग पेश होते थे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट पेश किया जो इस प्रकार है  
– रेल बजट को आम बजट में मिलाना ऐतिहासिक कदम। इससे रेलवे सरकार की राजकोषीय नीति के केंद्र में आ गई है।
– सरकार आर्थिक वृद्धि का लाभ किसानों और कमजोर वर्गों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध।
– दोहरे अंक की मुद्रास्फीति नियंत्रण में, सुस्त वृद्धि तेज वृद्धि में बदली, कालेधन के खिलाफ लड़ाई छेड़ी।
– नोटबंदी साहसिक और निर्णायक फैसला।
– नोटबंदी अर्थव्यवस्था को साफसुथरा और स्वच्छ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में से एक। इसके दीर्घकालिक फायदे मिलना तय।
– बैंकों में बढ़ी जमा से ब्याज दरों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
– बजट में ग्रामीण इलाकों, गरीबी उन्मूलन व बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने पर जोर।
– बजट में कृषि ऋण के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य।
– किसानों की आय दोगुनी करने, युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाने और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहित बजट में 10 बिंदुओं पर जोर।
– फसल बीमा योजना के लिए 2017-18 में 9,000 करोड़ रुपये का प्रावधान। इस योजना का कवरेज 2016-17 के 30% से बढ़ाकर 2017-18 में 40%  तथा 2018-19 में 50% करने का लक्ष्य।
– विश्व बैंक का अनुमान 2017-18 में वृद्धि दर 7.6% तथा 2018-19 में 7.8% रहेगी।
– अनुबंधित खेती के लिए एक आदर्श कानून बनाया जाएगा।
– हम गरीबों की भलाई के लिए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
– चालू खाता घाटा मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में घटकर 0.3% रहा। पिछले वित्त वर्ष में यह 1% था।
– 2019 तक एक करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला जाएगा। 50,000 ग्राम पंचायतों को भी गरीबी मुक्त किया जाएगा।
– कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 4.1% रहने का अनुमान।
– मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण से जुड़ी सब्सिडी योजना की अवधि 15 से बढ़ाकर 20 साल की।
– वर्ष 2017-18 में मनरेगा के लिए 48,000 करोड़ रुपये का प्रावधान। 2016-17 में इसके लिए 38,500 करोड़ रुपये रखे गए थे।
– नोटबंदी का असर अगले वित्त वर्ष में जाने की आशंका नहीं।
– दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के लिए 2017-18 में 2,814 करोड़ रुपये।
– ग्रामीण एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 2017-18 में 1,87,223 करोड़ रुपये का प्रावधान।
– यूजीसी में सुधार करेगी सरकार।
– सभी 648 कृषि विज्ञान केंद्रों में योग्य स्थानीय उद्यमियों द्वारा सूक्ष्म मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी।
– प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह में 36% वृद्धि, जनवरी में विदेशी मुद्रा भंडार 361 अरब डॉलर जो 12 महीनों की जरूरत के लिए पर्याप्त।
– बेघरों के लिए 2019 तक एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य।
– उच्च शिक्षा की सभी परीक्षाओं के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाई जाएगी, सीबीएसई और अन्य एजेंसियों को मुक्त किया जाएगा।
– 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में महिला शक्ति केंदों के लिए 500 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
– 350 ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के साथ स्वयं प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव।
– झारखंड, गुजरात में दो नए एम्स का प्रस्ताव।
– वर्ष 2025 तक टीबी समाप्त करने का लक्ष्य।
– ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक नियमों में बदलाव का प्रस्ताव। :
– अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक समुदाय के लिए 2017-18 में आवंटन 35% बढ़ाकर 52,393 करोड़ रुपये का प्रावधान।
– प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रतिदिन 133 किलोमीटर सड़क निर्माण। 2011-14 के दौरान औसत सड़क निर्माण 73 किलोमीटर प्रतिदिन था।
– वरिष्ठ नागरिकों के लिए आधार कार्ड आधारित स्मार्ट स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाएंगे।
– मई 2018 तक 100% गांवों का विद्युतीकरण हो जाएगा।
– रेलवे को केंद्रीय बजट से 2017-18 में 55,000 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी। रेलवे का कुल पूंजीगत निवेश 1.31 लाख करोड़ रुपये रखने का प्रस्ताव।
– बजट में रेल रक्षा एवं संरक्षा कोष के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान।
– वर्ष 2017-18 में 25 रेलवे स्टेशनों का पुन: विकास किया जाएगा। 500 स्टेशनों को दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक बनाया जाएगा। 7,000 स्टेशनों पर सौर उर्जा की व्यवस्था होगी।
– नयी मेट्रो रेल नीति की घोषणा करेगी सरकार।
– आईसीआरटीसी के जरिये ई टिकट बुकिंग पर सेवा कर समाप्त होगा।
– सड़कों, हवाई अड्डों तथा अन्य बुनियादी क्षेत्रों के लिए 2017-18 में 2,41,387 करोड़ रुपये का आवंटन।
– बजट में फ्लूयोरॉइड और आर्सेनिक प्रभावित 28,000 रिहायशों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव। गांवों में अक्टूबर 2016 तक स्वच्छता का कवरेज 60%। पहले यह 42% था, इस प्रकार कुल 18% की वृद्धि।
– प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों का 600 जिलों तक विस्तार होगा। 100 अंतरराष्ट्रीय कौशल केंद्र खोले जाएंगे जिससे लोगों को विदेशों में नौकरी में मदद मिलेगी।
– 1.5 लाख स्वास्थ्य उपकेंद्रों को स्वास्थ्य वेलनेस केंद्रों में बदला जाएगा।
– इलेक्ट्रानिक विनिर्माण इलेक्ट्रानिक विनिर्माण क्षेत्र में प्रोत्साहन के लिए 2017-18 में 745 करोड़ रुपये का आबंटन।
– राष्ट्रीय आवास बैंक वित्त वर्ष 2017-18 में 20,000 करोड़ रुपये के व्यक्तिगत आवास ऋणों के लिए पुनर्वित्त सुविधा उपलब्ध कराएगा।
– राजमार्गों के लिए 2017-18 में 64,900 करोड़ रुपये का प्रावधान।
– स्वास्थ्य उपकरणों की लागत कम करने के लिए नए नियम तैयार किए जाएंगे।
– इंद्रधनुष योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 2017-18 10,000 करोड़ रुपये की शेयर पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।
– आदर्श दुकान एवं प्रतिष्ठान विधेयक महिलाओं को रोजगार के अतिरिक्त अवसर देगा।
– मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग 2020 तक समाप्त की जाएंगी।
– वरिष्ठ नागरिकों को 8% गारंटीशुदा रिटर्न के लिए एक योजना।
– 2017-18 में 3,500 किलोमीटर नई रेल लाइनों को चालू करने का लक्ष्य। 2016-17 में 2,800 किलोमीटर की लाइनें शुरू की जा रही हैं।
– आरबीआई में भुगतान नियामकीय बोर्ड बनाने का प्रस्ताव।
– डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए रेफरल बोनस योजना, कैश बैक योजना शुरू की जाएगी। आधार युक्त भुगतान प्रणाली भी जल्द शुरू होगी।जेटली
– दूसरी श्रेणी के शहरों में चुनिंदा हवाई अड्डों पर परिचालन शुरू होगा। इनका विकास पीपीपी माडल के तहत होगा।
– रेल कोच से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार का ‘कोच मित्र’ सुविधा का प्रस्ताव।
– रेल के किराये-भाड़े का निर्धारण लागत, सामाजिक जिम्मेदारी तथा प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया जाएगा।
– वर्ष 2017-18 में कुल 21,47,000 करोड़ रुपये के व्यय का बजट।
– दिल्ली और जयपुर में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र होंगे और पांच अन्य को बाद में स्थापित किया जाएगा।
– रक्षा क्षेत्र के लिए 86,484 करोड़ रपये के पूंजी व्यय सहित कुल 2,74,114 करोड़ रुपये का आबंटन। इसमें पेंशन राशि शामिल नहीं।
– वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2 प्रतिशत तथा 2018-19 में तीन प्रतिशत रखने का लक्ष्य।

– राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को 11 लाख करोड़ रुपये के संसाधनों का अंतरण।
– ओडिशा और राजस्थान में कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार स्थापित किए जाएंगे। यह पहले से निर्मित ऐसे तीन भंडारों से अलग होंगे।
– अगले वित्त वर्ष में राजस्व घाटा जीडीपी का 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान।
– देश से धन लेकर विदेश भाग जाने वाले लोगों की संपत्ति जब्त करने के लिए कानून बनाएगी सरकार।
– अब 90 प्रतिशत से अधिक एफडीआई प्रस्तावों को स्वत: मार्ग से मंजूरी दी जा रही है।
– सार्वजनिक निजी भागीदारी में बनायी जाने वाली बुनियादी ढांचा योजनाओं से जुड़े विवाद संस्थागत तरीके से हल किए जाएंगे।
– सरकार गरीब और निर्दोष निवेशकों के संरक्षण के लिए बहु राज्य सहकारी कानून में संशोधन करेगी।
– चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में अग्रिम व्यक्तिगत आयकर भुगतान में 34.8 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।
– हमारा समाज काफी हद तक कर अनुपालन नहीं करता है।
– वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा के लिए कंप्यूटर आपातकाल रिस्पांस टीम बनायी जाएगी।
– पिछले साल आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर तक 1.09 करोड़ बैंक खातों में दो लाख रुपये से लेकर 80 लाख रुपये तक की राशि जमा कराई गई। प्रत्येक बैंक खाते में औसतन 5.03 लाख रुपये जमा किए गए।
– टेली-मेडिसन और शिक्षा के प्रसार के लिए डिजि गांव पेश होंगे।
– 1.48 लाख बैंक खातों में 80 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा की गई। औसतन प्रत्येक खाते में 3.31 करोड़ रपये जमा हुए।
– 50 करोड़ रुपये सालाना तक का कारोबार करने वाली कंपनियों पर कंपनी आयकर की दर घटाकर 25 प्रतिशत की गई।
– बजट में आवास क्षेत्र के लिए कर में कई रियायतें।
– मुद्रा योजना के तहत वित्त वर्ष 2017-18 में 2.44 लाख करोड़ रुपये वितरण का लक्ष्य।
– एलएनजी पर मूल सीमा शुल्क 5 से घटाकर 2.5 प्रतिशत किया गया।
– सरकार ने तीन लाख रुपये से अधिक के लेनदेन में नकदी के प्रयोग पर पाबंदी की कालेधन पर एसआईटी की सिफारिश को स्वीकार किया। आयकर कानून में इसके लिए संशोधन किया जाएगा।
– इलैक्ट्रॉनिक भुगतान के विनियमन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के तहत ही भुगतान विनियामक बोर्ड का गठन किया जाएगा। यह भुगतान एवं निपटान प्रणाली में नियमन एवं निगरानी बोर्ड का स्थान लेगा।
– राजनीतिक दल किसी व्यक्ति से 2,000 रुपये से अधिक नकद चंदा नहीं ले सकेंगे।
– अचल संपत्ति पर दीर्घावधि के पूंजीगत लाभ कर की तीन साल की अवधि को घटाकर दो साल किया गया। आधार वर्ष एक अप्रैल 1981 से एक अप्रैल 2001 किया गया।
– छोटी कंपनियों पर कर में कटौती से 7,200 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।
– छोटे कारोबारियों के लिए अनुमानित कर देनदारी के लिए कारोबारी सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की गई।
– 2,50,000 रुपये 5,00,000 रपये तक की सालाना आय पर कर की दर 10 से घटाकर 5% की गई।
– 50,00,000 से एक करोड़ रुपये तक की सालाना आय पर 10% की दर से अधिभार लगाया जाएगा, इससे सरकार को 2,700 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
– प्रत्यक्ष कर क्षेत्र में दी गई रियायतों से सरकार को 20,000 करोड़ रुपये के राजस्व का शुद्ध नुकसान।
– एक करोड़ रुपये से अधिक की आय पर 15% का अधिभार बना रहेगा।
– वर्ष 2017-18 के बजट में खर्च के योजना, गैर-योजना वर्गीकरण को समाप्त किया गया ताकि बेहतर तस्वीर पेश की जा सके।
– गन्ना बकाया के भुगतान के लिये 9,000 करोड़ रुपये अधिक आवंटन।
– वर्ष 2018 में उच्च-गति का ब्रांडबैंक उपलब्ध कराने के वास्ते भारत नेट प्रोजैक्ट के लिये 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन।
– कच्चे तेल के रणनीतिक आरक्षित भंडार पहले से तैयार तीन स्थानों के अलावा ओडिशा और राजस्थान में भी बनाये जायेंगे।
– सौर उर्जा विकास के दूसरे चरण की होगी शुरुआत, 20,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य।
– सार्वजनिक क्षेत्र में एक बड़ी एकीकृत तेल कंपनी खड़ी की जायेगी जो कि दुनिया की दूसरी वैश्विक तेल कंपनियों के मुकाबले की होगी।
– पांच लाख रुपये से अधिक सालाना आय बताने वाले कुल 76 लाख लोगों में 56 लाख लोग वेतनभोगी तबके से।
– एक सीमा से अधिक के सभी सरकारी भुगतान इलेक्ट्रानिक तरीकों से प्राप्त करने के प्रस्ताव पर विचार।
– प्रधान डाकघरों से भी जारी किये जायेंगे पासपोर्ट।
– डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिये विभिन्न प्रकार की पीओएस और आयरिश रीडर मशीनों पर शुल्कों में छूट।
– एफपीआई को अप्रत्यक्ष हस्तांतरण प्रावधानों से मिलेगी छूट।
– वित्त वर्ष 2015-16 में आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले 3.7 करोड़ लोगों में से 99 लाख लोगों ने अपनी आय छूट सीमा से कम दिखाई।
– संगठित क्षेत्र में काम करने वाले 4.2 करोड़ लोगों में से केवल 1.74 करोड़ लोगों ने
– वर्ष 2016-17 में लगातार दूसरे साल प्रत्यक्ष कर राजस्व में 17 प्रतिशत वृद्धि हासिल।
– स्टार्ट अप के लिये कर रियायतें लेने के नियमों में राहत।.
– 65 मिलिमीटर तक लंबाई वाली सिगरेट पर उत्पाद शुल्क 215 रपये प्रति एक हजार से बढ़ाकर 311 रुपये प्रति हजार किया गया।
– तंबाकू (गुटखा) वाले पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 10% से बढ़ाकर 12% किया गया।
– एल्यूमीनियम महंगा, इसके अयस्क और कंसंट्रेट पर आयात शुल्क शून्य से बढ़ाकर 30% किया गया।
– मोबाइल फोन विनिर्माण में काम आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर दो प्रतिशत किया गया।
– सौर उर्जा बैटरी और पैनल के विनिर्माण में काम आने वाले सोलर टैम्पर्ड ग्लास को सीमा शुल्क से छूट।
– एलईडी बल्ब विनिर्माण में उपयोग होने वाले कलपुजों पर 5% की दर से मूल सीमा शुल्क और 6% प्रतिपूर्ति शुल्क लगेगा।
– पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 6% से बढ़ाकर 9%, गैर-प्रसंस्कृत तंबाकू पर 4.2 से बढ़ाकर 8.3% किया गया।
– सिगार, सुल्फी (चुरट) पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 12.5% अथवा प्रति हजार 4006 रुपये जो भी अधिक होगा, किया गया। पहले यह दर 12.5% और 3,755 रुपये प्रति हजार थी।
– न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को हटाना अथवा कम करना व्यवहारिक नहीं, मैट क्रेडिट का लाभ उठाने के लिये मौजूदा 10 वर्ष के बजाय 15 वर्ष तक का समय देने का प्रस्ताव।


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